फिल्मी दुनिया का बड़ा हस्ती इकबाल दुर्रानी मुंबई से सिमुलतला पहुंचे , जिन्होंने सामवेद को ऊर्दू में लिखा
सिमुलतला जमुई से बाबर अंसारी का रिपोर्ट
मैंने शाहरुख खान, अजय देवगन और ममोटी जैसे कलाकारों का पहला इंटरव्यू लिया है। अपने जीवनकाल में कुल 56 फिल्में बनाई। जो सकून व खुशी मुझे सामवेद का हिंदी और उर्दू में रूपांतरण करने में मिला वह कार्य सबसे बड़ा हैं। मैं सौभाग्यशाली हूं की इतना बड़ा कार्य को मैं मूर्तरुप दिया। धारा के विपरीत चलने वाले इतिहास रचते है। धारा के अनुसार चलकर रुक्मणि कृष्ण से विवाह किया। राधा धारा की विपरीत चलकर पूजनीय हो गई। क्योंकि धारा का उल्टा राधा होता है। जो धारा के उल्टा चलता है वही पानी उछाल मारता हैं। बताया की वेद को जानो वेद में न कोई जाति है और न ही धर्म। फूल और कांटे 2, गांधी से पहले गांधी और एक अन्य फिल्म पर कार्य कर रहा हूं। फूल और कांटे 2 में मेरा बेटा मशाल दुर्रानी मुख्य किरदार में हैं। मुझे आपार खुशी है की मेरे द्वारा लिखा गया किताब झारखंड में पढ़ाए जाएंगे। वेद सभी चीजों से ऊपर है। जाति, धर्म आदि सब बाद में आया। सिमुलतला स्थित नोलढेंगा राजवाड़ी की खूबसूरती देख अभिभूत होकर कहा संरक्षित रखने के लिए सरकारी स्तर पर पहल होना चाहिए। यह जगह मिनी शिमला के नाम से चर्चित है। बंगाली सैलानियों की सुंदर कोठियां यहां की खूबसूरती को चार चांद लगाता है। बिहार में वह सहयोग लोगों को नहीं मिलता जो बाहर में मिलता है। सिमुलतला आने पर मुझे यह देख खुशी लगी की यहां के लोग सहयोग करने वाले है। सिमुलतला में होटल और पास ही देवघर में एयरपोर्ट है। जो कलाकारों के लिए आवागमन के लिए मुफीद बनाता हैं। मैं रोमांटिक हूं लेकिन मैंने रोमांटिक में कुछ लिखा नहीं हूं। मेरे द्वारा बिरसा मुंडा पर लिखी गई किताब झारखंड में पढ़ाई जाएगी। यह बात मुझे गौरांवित करती हैं। 1983 – 84 में घर छोड़ मुंबई निकल गया। पांच भाई और तीन बहन में अकेला में पेड़ बना बाकी सभी घास रह गए। मैंने काफी परिश्रम किया। झोपड़पट्टी में रहा। मैं अकेला निर्माता हूं जो गरीबी, मध्यवर्गी और अमीरी को नजदीक से देखा हूं। फिल्मी इंडस्ट्रीज की तरह सभी जगह हो जाए जहां न कोई जाति है और न ही कोई धर्म। सब कर्म प्रिय है। आपमें क्षमता है तो आप आगे जाएंगे नहीं तो फिर कोई आपको पूछने वाला नहीं है। अपने यहां क्या है धर्म प्रधान होने से हमने धर्म और कर्म दोनों को खराब कर दिया। कोई दोषी है वह आपका भाई है तो उसे दंड मिले लेकिन हम उसे बचाना चाहते है। हम ये नहीं देखते की उसका कर्म खराब है। मैंने फिल्म के माध्यम से प्रेम बांटने का काम किया है। सामवेद का रूपांतर कर भी मैं लोगों में प्रेम बांटना चाहता हूं। वेद हमारा बुनियाद है लोग दूसरी किताबों में चले गए वेद को भूल गया। हम सभी कहते है वैदिक धर्म को मानते है लेकिन वेद को पढ़ते नहीं हैं।

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