देवघर से प्रेम रंजन रंजन झा का रिपोर्ट

*विशेष उपस्थिति :*
*आचार्य महामंडलेश्वर श्री श्री 108 विशेश्वरानंद भारती जी महाराज*

*गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने की परिक्रमा, साधु–संतों से लिया आशीर्वाद*

देवघर
उन्होंने कहा स्वामी हरिहरानंद जी महाराज के और संत महापुरुषों के प्रति आभार प्रकट किया उन्होंने कहा देवघर की भूमि में यह यज्ञ का आयोजन कर बहुत पुन्य में अवसर प्रदान किया है इसके प्रति में उनका आभार प्रकट करता हूं

अति रुद्र महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन देवघर का आध्यात्मिक वातावरण मानो किसी दिव्य उत्सव का प्रत्यक्ष दृश्य बन गया। सुबह जैसे ही सूर्य की पहली किरणें देवभूमि पर पड़ीं, पूरा परिसर शंखनाद, मृदंग, वेद–मंत्रों और हवन्-कुण्डों की सुगंधित आहुतियों से पवित्र हो उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे बैद्यनाथधाम स्वयं श्रद्धा के शिखरों पर अवस्थित हो।

परिक्रमा मार्ग आज भक्ति से सरोबार मानो एक आस्था–यात्रा बन गया। महिलाएँ मंगल गीत गाती आगे बढ़ रही थीं, तो बुजुर्ग शिवनाम जपते—हर कदम पर आस्था का अनुपम प्रवाह दिख रहा था। बच्चे फूल बरसाते और कचनार की पंखुड़ियाँ हवा में उड़ती दिखीं—यह दृश्य देवघर को एक अलौकिक आध्यात्मिक रंग दे रहा था।

*संत-महात्माओं की दिव्य सभा, रामायण पर स्वामी जी के विशेष उपदेश*

श्री श्री 108 महामंडलेश्वर विशोकानंद भारती जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी आनंद चैतन्य जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी पंचमानंद जी महाराज, स्वामी ज्योतिर्मयानंद जी और स्वामी विवेकानंद जी महाराज का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ।

मंच संचालन स्वामी सर्वेश्वरानंद सरस्वती और आचार्य शुभेष शर्मन ने किया।

*आज की कथा में आचार्य महामंडलेश्वर श्री श्री 108 विशेश्वरानंद भारती जी महाराज ने रामायण पर विशेष प्रकाश डालते हुए कहा—*

“रामायण केवल कथा नहीं—मर्यादा, करुणा, सत्य और आदर्श जीवन का प्रकाशस्तंभ है।
भगवान श्रीराम ने वनवास में जो धैर्य धारण किया, वही धैर्य मनुष्य के जीवन में चमत्कार कर देता है।”

*महाराज जी ने सुंदर ढंग से कहा*
“अयोध्या का एक सामान्य नागरिक केवल ‘राम’ नाम का उच्चारण कर धन्य हो जाता था…
वैसे ही प्रभु का सुमिरन करने वाला हर हृदय आज भी दिव्य हो जाता है। भक्ति की एक श्वास भी मनुष्य को प्रभु के चरणों तक पहुँचा सकती है।”

*उन्होंने राम–भक्ति को जीवन का आधार बताते हुए कहा*
“श्रीराम का चरित्र हमें सिखाता है कि संकट चाहे कितना भी बड़ा हो, धर्म और सत्य पर अडिग व्यक्ति कभी पराजित नहीं होता। उसी रामत्व को जीवन में अपनाना ही सच्ची साधना है।”

आज भागवान के वामन अवतार की चर्चा की, तथा सदस्यों द्वारा वमं अवतार की जीवंत प्रस्तुति की गयी।
*सांसद निशिकांत दुबे हुए शामिल*
*देवघर को बताया—‘लोक कल्याण का सर्वोच्च आध्यात्मिक केंद्र’*

आज गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे भी महायज्ञ में पहुँचे। वे जैसे ही यज्ञ स्थल पहुँचे, वातावरण में जयघोष बढ़ गया। उन्होंने परिक्रमा कर यज्ञ-अग्नि को नमन् किया और संत–समाज से आशीर्वाद लिया।

*सांसद दुबे ने कहा—*
“देवघर वह धरा है जहाँ धर्म, अध्यात्म और लोक कल्याण एक साथ प्रवाहित होते हैं।
अतिरुद्र महायज्ञ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि विश्व शांति का सशक्त माध्यम है।”
उन्होंने स्वामी महामंडलेश्वर हरिहरानंद सरस्वती जी से भेंट की और रमाकांत मिश्रा के प्रवचन स्थल पर पहुँचकर आशीर्वचन ग्रहण किया।
उन्होंने आयोजन समिति को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह महायज्ञ देवघर की आध्यात्मिक पहचान को और भी सशक्त करता हे

*सांस्कृतिक संध्या में मनोज अजीत की शानदार प्रस्तुति, पूरा पंडाल झूम उठा*
अतिरुद्र महायज्ञ के तहत आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में आज प्रसिद्ध कलाकार मनोज अजीत ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से पूरे वातावरण को मंत्रमुग्ध कर दिया। सबसे पहले उन्होंने

*श्री गणेश वंदना * से कार्यक्रम की शुरुआत की। उसके बाद एक से बढ़कर एक भजनों की झड़ी लगा दी –

1,धुल तेरे चरणों की सतगुरु चंदन और अबीर बने
2,यहाँ कण कण में शंकर है, देवों का घर देवघर है
3,यज्ञ की ये सनातन संस्कृति, लोक परलोक तार देती
4,श्री राधे राधे बोल रे
नाम अनमोल रे।
5, होता है सारे विश्व का कल्याण यज्ञ से
जल्दी प्रसन्न होते हैं
भगवान यज्ञ से।
6,मिलेगा साँवरिया
बजेगी बांसुरिया
7,जिसे बरसाना जाना है
अयोध्या आये मेरे प्रभु राम, बोलो जय जय श्री राम।
*जैसे ही उन्होंने अपना लोकप्रिय गीत*
*कन–कन में शंकर है, देवो का घर यह देवघर है…”*

गाना शुरू किया, पूरा पंडाल तालियों और उत्साह की गूंज से भर उठा।
दर्शक गीत की लय पर इस कदर झूमे कि क्षणभर को मंच और मैदान एक साथ थिरकने लगे। महिलाएँ, युवा और वरिष्ठ सभी ने उत्साह से कदम मिलाए और मनोज अजीत की आवाज़ पर पूरा परिसर शिव–भक्ति और देवघर की महिमा से हिलोर लेने लगा।
यह प्रस्तुति आज के सांस्कृतिक कार्यक्रम की सबसे यादगार झलक बनकर उभरी।

*भव्य आयोजन में समाज की एकजुट भूमिका*
यह आयोजन स्वामी ब्रह्मलीन ने स्वामी परमहंस शारदानंद सरस्वती महाराज के शुभ संकल्प की पूर्ति हेतु लोक कल्याणार्थ, राष्ट्र समृद्धि के लिए किया जा रहा है, जिसमें भारत के भिन्न-भिन्न प्रांतों से उनके सदस्य गण रूप में बाबा बैद्यनाथ धाम पधारे हैं और संपूर्ण यज्ञ को अनुष्ठान रूप में संपादित करने में अपनी-अपनी समर्पित भूमिका निर्वहन करते है ।

यज्ञ के उप आचार्य एवं मंच संचालक आचार्य शुभेश शर्मन ने बहुत ही खूबसूरत अंदाज़ में कार्यक्रम संचालित किया ।
कार्यक्रम की सफलता में संयोजक प्रेम कुमार सिंघानिया, मुख्य यजमान राजेश सतनालीवाला, अध्यक्ष विनोद कुमार सुल्तानिया, महामंत्री रमेश कुमार बाजला, कोषाध्यक्ष CA गोपाल चौधरी, प्रचार–प्रसार टीम के पंकज कुमार पचेरीवाला, संजीव चोपड़ा, गज्जू भैया गजानंद, संजय कुमार बंका, बजरंग बथवाल, संजय बाजला, हरीश तोलासरिया, अक्षत सिंघानिया, प्रत्यूष सुल्तानिया, कृष्ण सुल्तानिया, अनिल टेकरीवाल, दिलीप सिंघानिया, पवन गर्ग, गिरधारी अग्रवाल (बिलासपुर), सुनील अग्रवाल, रितेश पचेरीवाला, सुनील भोपालपुरिया, प्रवीण गर्ग, शुभकरण सुल्तानिया, रेनू सिंघानिया सहित सैकड़ों महिला–पुरुषों का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा।

समिति के मुख्य सलाहकार डॉ. गिरधारी लाल अग्रवाल ने बताया कि
प्रातः 8 बजे से अतिरुद्र महायज्ञ,
भगवत कथा में भगवान कृष्ण के जन्म की कथा सुनाई जाएगी और नंदोत्सव हम आप सब मिलकर मनाएंगे।
शाम 7 बजे से अखिल भारतीय स्तर की कलाकार वासंती वार्ष्णेय बिलासपुर के द्वारा कत्थक नृत्य नाटिका का मंचन होगा।


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