
देवघर से प्रेम रंजन झा का रिपोर्ट

आज प्रेस वार्ता के माध्यम से भाजपा जिला अध्यक्ष सचिन रवानी ने कहा- की राष्ट्रगीत वंदे मातरम का डेढ़ सौ वर्ष पूरे हो रहे हैं । नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलने वाली सरकार के मंत्रिमंडल ने 1 अक्टूबर 2025 को निर्णय लिया है की वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत को उत्सव के रूप में मनाएंगे।

स्वतंत्रता संग्राम में इस गीत की महत्व पूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए डेढ़ सौ वर्ष के स्मरण में राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम हो ऐसा निर्णय लिया है।

यह गीत 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचा गया और वंदे मातरम का गायन वर्ष 1896 में रविंद्र नाथ टैगोर के द्वारा कोलकाता में किया गया था ।

भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने 1950 में वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया जो सम्मान का विषय था।
देशभर में विभाजन के विरोध में हुए आंदोलन के दौरान वंदे मातरम राष्ट्रवाद, एकता का सशक्त प्रतीक बन गया। ब्रिटिश शासन का प्रतिरोध शब्द बन गया। वंदे मातरम गीत राष्ट्रीय भावना के कारण ब्रिटिश सरकार ने इस नारे पर प्रतिबंध लगा दिया।
वंदे मातरम स्वदेशी आंदोलन का प्रमुख नारा बना और नारा बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय ,भगत सिंह सुभाष चंद्र बोस जैसे क्रांतिकारियों का प्रेरणा स्त्रोत बना।
1923 में काकीनाडा में कांग्रेस अधिवेशन हो रहा था वंदे मातरम गाने के लिए पंडित विष्णु दिगंबर पुलस्कर को बुलाया गया था लेकिन इस कांग्रेस के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद अली ने धार्मिक आधार पर आपत्ति किया और कहा कि इस्लाम में संगीत वर्जित है।
कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के नेताओं को खुश करने के लिए 1937 में वंदे मातरम को बदलने का निर्णय लिया।
2017 में एआइएमआइएम के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने स्कूलों में वंदे मातरम की अनिवार्यता को खत्म किया जाए ऐसा उसने कहा।
उसे समय तेलंगाना सरकार ने अनिवार्यता को खत्म कर दी ।2019 में मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार ने वंदे मातरम गीत पर प्रतिबंध लगा दिया।
इस तरह से कांग्रेस के समय में तुष्टीकरण की राजनीति होती आई है ।कल 7 नवंबर है वंदे मातरम का डेढ़ सौ वर्ष पूरे हो रहे हम सभी मिलकर देवघर जिला के वीर कुंवर सिंह चौक पर उत्सव के रूप में मनाएंगे। हम सभी देवघर जिला के वासीयो से आग्रह करते हैं इस राष्ट्रीय गीत पर शामिल होकर इस कार्यक्रम को सफल बनावे।
प्रेस वार्ता के मौके पर जिला महामंत्री अधीर चंद्र भैया, संतोष उपाध्याय,प्रो राजीव रंजन सिंह, विजया सिंह ,सचिन सुल्तानिया, भूषण सोनी, निशा सिंह आदि थे।

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