देवघर से आशुतोष झा के संग प्रेम रंजन झा का रिपोर्ट
देवघर। स्वास्थ्य विभाग में इतनी अराजकता की स्थिति बनी हुई है कि एक ही एएनएम को सदर अस्पताल के लेबर वार्ड एवं ओटी का इंचार्ज बना दिया गया है जिससे उनकी तो चांदी कट रही है लेकिन विभागीय कार्यशैली के सौतेलेपन से स्वास्थ्य महकमा प्रभावित हो रहा है सदर अस्पताल में योग्य कर्मियों की नियुक्ति नहीं होने से लोगों को उपयुक्त स्वास्थ्य सेवा नहीं मिल पा रहा है।जिससे बिचोलिए हावी हो गए हैं जिससे उनकी मनमानी लगातार बढ़ती ही जा रही है। लेबर वार्ड में मनचाहा पैसा देकर मनचाहा डयूटी लेने की होड़ मची हुई है। जो एएनएन सेवा शुल्क देने में सक्षम है उन्हें मनचाहा डयूटी तो मिलती ही है साथ ही विगत 6 से 8 वर्षों से लेबर वार्ड में ही कुंडली मार कर अब तक बैठी हुई है वहीं रोस्टर बनाने वाले लिपिक ने लेबर वार्ड में डयूटी देने के लिए रेट फिक्स कर दिया है 10000 से 15000 रुपये चुकाने के बाद उनको डयूटी मिलती है अन्यथा डयूटी से वह वंचित रह जाती है। जिसका खामियाजा गरीब जनता को भुगतनी पड़ती है।देवघर जिले की किसी भी पीएचसी व सीएचसी में डिलीवरी कराने पर 500 से 1500 रुपए तक तो उनको चुकाना ही पड़ता है मगर जब वहां से उसी पेशेंट को सदर अस्पताल देवघर के लेबर वार्ड में रेफर कर दिया जाता है तो वहां से सरकार द्वारा प्रदत्त एम्बुलेंस 108 में फ्री में तो सदर अस्पताल पहुंच जाती है मगर यहां के लेबर वार्ड में आते ही उनका दोहन व शोषण शुरू हो जाता है 3000 से 6000 रुपये के बीच में अवैध रूप से जबरन धौंस दिखा कर राशि वसूली जाती है या यूं कह सकते हैं कि यहां पर अभी भी जमींदारी प्रथा लागू है इन पर किसी का लगाम नहीं है जिनकी लाठी उनकी भैंस वाली कहावत चरितार्थ होती है लेबर वार्ड में कार्यरत एएनएम बेलगाम हो चुकी है यहां तक कि कई एएनएम तो ऐसी भी है जिनके द्वारा मरीज के परिजन को लेबर वार्ड में घुसाकर उनका बदन जांच पड़ताल कर उनसे जबरन पैसे छीन लिए जाते हैं और उन्हें किसी को भी नहीं कहने के लिए डरा धमका दिया जाता है।जो व्यक्ति पैसे देने से इनकार करते है उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है। इनके लिए यहां भ्रष्टाचार तो शिष्टाचार बना हुआ है जबकि यहां के वरीय पदाधिकारी अवैध उगाही रूपी भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के बजाय एएनएम को प्रोत्साहित करते हैं।इस अवैध उगाही में संलिप्त पदाधिकारी व एएनएम की मिली भगत से इनकार नहीं किया जा सकता है यहां पर कार्यरत एएनएम को लूट की पूरी खुली छूट मिली हुई है। सभी एएनएम अवैध उगाही को अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझती है।वहीं अर्बन हेल्थ में चल रहे क्लिनिक की एएनएम को लेबर वार्ड में अवैध उगाही ही करने के लिए डयूटी लगाई गई है जबकि एसबीए की जितनी एएनएम है सभी को रोटेशन पॉलिसी के आधार पर लेबर रूम में डयूटी मिलना चाहिए पर उन्हें इससे वंचित रखा जाता है यहां पर ऐसा कुछ भी नहीं होता है जिससे प्रसूति मरीजों को सरकार द्वारा दी जा रही जनकल्याणकारी योजना का लाभ मिल सके।यहां पर सिर्फ लिपिक की मनमानी चलती है जबकि एक ही एएनएम को बार-बार लेबर वार्ड में डयूटी दी जाती है उनका कोई रोटेशन नहीं होता है कुछ एएनएम तो आज तक फील्ड की ड्यूटी तक नहीं की है पर लेबर रूम पर उनका पूरा कब्जा है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) योजना को ताक पर रखकर कई एएनएम तो लगातार विगत 5 व 6 वर्षों से लेबर वार्ड में ही डेपुटेशन पर डयूटी कर रही है जिससे उनका आतंक चरम सीमा पर ही नहीं हैं बल्कि उनका दबदबा अब तक कायम है जिससे सदर अस्पताल की व्यवस्था काफी चरमराई हुई है साथ ही लेबर वार्ड में नाईट में ही उनकी ऑन डिमांड डयूटी लिपिक के द्वारा लगाई जाती है उनके इशारों पर ही लेबर वार्ड की दशा व दिशा तय की जाती है। उनकी वजह से सरकार द्वारा चलाए जा रहे जनहित कार्यक्रम के तहत एनआरएचएम योजना फ्लाप साबित हो रहा है। जिससे सदर अस्पताल की छवि ही नहीं बल्कि सरकार की छवि भी धूमिल हो रही है।इस मामले को लेकर संबंधित पदाधिकारी का ध्यान अपेक्षित है। मामले को लेकर जब संबंधित पदाधिकारी से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उनका मोबाइल स्विच ऑफ बताया।भ्रष्टाचार में संलिप्त पदाधिकारी मौन व मस्त हैं।जबकि पदाधिकारी के मौन रहने से लूट खसोट का धंधा फल फूल रहा है।

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