देवघर से प्रेम रंजन झा का रिपोर्ट
4 जनवरी 2026से प्रारंभ होने वाला माघ महीना अत्यंत पवित्र और जीवन की सभी मनवांछित कामनाओं की सिद्धि करने वाला माना गया है।
माघ मास को सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है, जिसमें स्नान, दान, व्रत और भगवान विष्णु की उपासना का विशेष महत्व है।
माघ मास हिंदू पंचांग का ग्यारहवाँ चंद्रमास है, जो पौष पूर्णिमा के बाद प्रारंभ होता है और माघ पूर्णिमा तक चलता है। इस वर्ष यहां सूर्योदय के गाना अनुसार 4 जनवरी 2026 से शुरू हो रहा है।
यह शीत ऋतु का महीना होता है।
शास्त्रों में माघ मास को “पुण्यकाल” और “मोक्षप्रद” कहा गया है।मान्यता है कि इस मास में किया गया स्नान, दान, जप, तप और व्रत अक्षय पुण्य देता है तथा पापों का नाश करता है।
पद्मपुराण में कहा गया है कि भगवान श्रीहरि (विष्णु) को पूजा करने से जितनी प्रसन्नता नहीं होती, उतनी प्रसन्नता माघ मास में स्नान मात्र से होती है
इसीलिए इसे “माघ स्नान” का विशेष महत्व है।
माघ स्नान और कल्पवासमाघ मास में पवित्र नदियों (विशेषकर गंगा, यमुना, सरस्वती के संगम) में स्नान का विशेष महत्व है।
शास्त्र कहते हैं:
“माघे निमग्नाः सलिले सुशीते विमुक्तपापास्त्रिदिवं प्रयान्ति।”
मानस में गोस्वामी तुलसीदास जी लिखते हैं कि
माघ मकरगत रबि जब होई। तीरथपतिहिं आव सब कोई॥
देव दनुज किंनर नर श्रेनी। सादर मज्जहिं सकल त्रिबेनीं॥
(बालकाण्ड, चौपाई ४३.२)
(माघ मास में ठंडे जल में डुबकी लगाने वाले पापमुक्त होकर स्वर्ग को प्राप्त होते हैं।)
इसी मास में प्रयागराज (इलाहाबाद) के संगम पर “कल्पवास” की परंपरा है, जहाँ एक महीने तक व्रत, स्नान, दान और साधना करने से मोक्ष की प्राप्ति का वर्णन है।
माघ मास में दान का विशेष महत्व है, जिसे “अक्षय दान” कहा जाता है।
इस मास में निम्न दान विशेष फलदायी माने जाते हैं:अन्न, वस्त्र, कंबल, घी, तिल और गुड़ का दान।
जरूरतमंदों को भोजन कराना।
तिल दान करने से नरक का दर्शन नहीं होता, यह महाभारत में उल्लेखित है।
माघ मास भगवान विष्णु (माधव) और माता लक्ष्मी की उपासना के लिए विशेष उपयुक्त है।
इस मास में विष्णु की पूजा, व्रत और गंगा स्तोत्र/स्तुति का पाठ करने से भगवान की कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति की संभावना बढ़ती है।
सूर्य देव की उपासना का भी विशेष महत्व है; सूर्योदय के समय सूर्य को जल अर्पित करने से स्वास्थ्य, धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
यह मास तप, जप, ध्यान और आत्मशुद्धि का समय माना जाता है।
इस मास में द्वादशी तिथि पर दिन-रात उपवास करके भगवान माधव की पूजा करने से राजसूय यज्ञ का फल प्राप्त होता है, ऐसा शास्त्रों में कहा गया है।
माघ मास में निम्न नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है:
सुबह जल्दी उठकर स्नान करना और शरीर को शुद्ध रखना।तामसिक भोजन (मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज आदि) से बचना।झूठ, कटु वचन, ईर्ष्या, लोभ, क्रोध और किसी को दुख देने से बचना।व्यसनों (धूम्रपान, मदिरा आदि) से दूर रहना।
द्वार पर आए व्यक्ति को खाली हाथ न लौटाना और दान-पुण्य करना।
माघ मास के व्रत, स्नान, दान और भगवान की उपासना से निम्न लाभ मिलते हैं
पापों का नाश और आत्मशुद्धि सुख, सौभाग्य, धन, संतान और स्वास्थ्य की प्राप्ति।
भगवान विष्णु की कृपा और जीवन में खुशहाली अंततः मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग।
भगवान की आराधना जी कामना से की जाती है निश्चय ही महीने भर के तपस्या से वह कामना शीघ्र पूरी हो जाती है।

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