हाजीपुर से रविन्द्र कुमार रतन का रिपोर्ट
अपने प्रगति यात्रा के द्वारा सूबे के
आदरणीय मुख्य मंत्री नीतीश कुमार ने जनता में घूम- घूम कर उनकी समस्याओं को सुना , देखा परखा और उसका यथो- चित समाधन करते हुए आगे बढते रहे , मानो महात्मा गाँधी की डांडी यात्रा से प्रभावित हों। इस प्रगति यात्रा में जनता की भी सुने और जनता को भी किए जा रहे
विकास कार्यो से रुबरु करा रहे है।
मेरा विचार है कि जैसे ,
‘ अकेला चना भाड़ नहीं फोरता है ‘ ठीक वोएसे ही कोई कितनाहुँ ईमानदार हो,परिश्रमी हो , सजग हो, सरल हो विकास नहीं कर सकता ,
सुशासन नहीं ला सकता जब
तक टीम भावना न हो , यही उक्ति बिहार मे लागू हो रही है। बिहार के विकास और अपने सैद्धांतिक अस्मिता की रक्षा के लिए वे गठबंधन तक बदलते रहे ।इस गठ बन्धन धर्म का निर्वाह के फेरे में उन्हे कई बार अपनी इच्छा के विरूद्ध भी निर्णय लेना पड़ा । एक इन्जीनियर, प्रदेश की राजनीति में सुशासनका पहल कर आमूल परवर्तन करता है, सडक, शिक्षा , चिकित्सा के क्षेत्र मे ही नही अपितु कानुन व्यवस्था में भी परिवर्तन ला कर एक रोते हुए बिहार को हँसता हुआ बिहार में बदलने का प्रशंसनीय प्रयास करता है ,जो जमीन पर आज साफ-साफ दिखाई दे रहा है ।
प्रथम मुख्य मंत्रीत्व काल में उनकी संख्याबल उनके अनुकूल था।दुसरे कार्यकाल में राजनीतिक षडयंत्र के कारण या काम का उचित मूल्यांकन
नही होने के कारण उनका संख्या बल कम हुया तो भी सरकार तो उनके एनडीए की ही बनी । जिसके पास तो संख्या बल कम नहीं था।तभी तो एनडीए की सरकार बनी? इसे निर्बाद्ध रुप से पाँच साल चलने देना चाहिय था और विपक्ष का सकारत्मक सहयोग मिलना चाहिय ।
मैं भाजपा का एक छोटा सा सिपाही हूँ,मेरे लिए किसी बड़े नेता के बारे में कुछ भी कहना ‘ छोटा मुंह बड़ी बात होगी’।मगरआये दिन हो रहे ओछे व्यान बाजी के कारण बोलना पड्ता है कि आज के कुशल राजनीतिज्ञ भी गठ बन्धन धर्म का यथोचित पालन नहीं कर पा रहे हैं विपक्षी बोलते हैं तो कोई बात नही,उनका तो धर्म ही है विपक्ष में बोलना , नहीं तो विपक्षी कहाएंगे कैसे ?हालां कि सकारत्मक्ता में तो सपोट मिलनाही चाहिय। इसका उदाहरण स्मृति शेष अटल बिहारी है जिन्होने एक बार इन्दिरा गाँधी की तारिफ ही नहींं उन्हे दुर्गा भी कहा था,वे लोग मूल्य की राजनीति करते थे।2005 के बाद जबसे नीतीश कुमार भाजपा के साथ अर्थात एन डी ए की सरकार बनाए मुख्यमंत्री के रूप में बिहार को विकास की ऊंचाई पर ले जाने का का काम किया ।तो पाँच वर्षों तक गठबंधन के लोंगो को अपने सुशासन बाले मुख्य मंत्री के विचार धारा और कार्य क्रमो का साथ नि :संकोच देना है तभी न विकास हो सकेगा।अमन चैन से ही सरकार विकास कर सकेगी, डर और भय के माहोल में कोई विकास कैसे कर सकता है? लोकतंत्र का निर्माण ही ऐसे होता है कि ‘ सरकार पर जानता का विश्वास हो,और सरकार का जनता पर विश्वास हो ‘पाँच वर्ष अगर विकास हो तो ठीक
अन्यथा जानता मालिक है । मगर बिच में ही विपक्ष के लोग एक दुसरे पर प्रश्न उठाने लगेंगे तो कैसे बिहार का विकास होगा ? कैसे भला होगा? सरकार बदलते रहने से नहीं अपितु सरकारसे काम कराने से विकास होगा।जनता सब देखती है,सब समझती है
और सोच समझ कर अपना निर्णय दे देती है।
आदरणीय राजनीतिज्ञ उपेन्द्र कुशवाहा ,माझी ,स्नेह प्रिय चिराग ही नहीं अपितु एन डी ए के सभी घटक को अपनी सरकार समझ कर कन्धा से कन्धा मिलाकर काम करना र्होगा।आपस मे प्रेम ! भरत सम भाव! स्नेह सहयोग से ही सुशासन लाया जा सकता है वरना विपक्ष तो मौके की तलाश में ही रह्ता है।जबसे सरकार बनी है तबसे हर सप्ताह सरकार गिरने का दावा करती रही और सरकार निर्वाध गति से चल रही है। सकारत्मक भुमिका अपना कर कुशल इंजीनियरिंग के तहत परिवारवाद,भाई भतीजावाद वंशवाद ,जाति,धर्म से मुक्त सुशासन की शैली में पाँच साल के लिए बनी सरकार को काम करने दें।बिहार को आगे बढ्ने दें।अदम्य उत्साह और सकारात्मक,ऊर्जावान मुख्य मंत्री को काम तो करने दें ।
तभी तो जनता उनकी कार्य
शैली , कार्य प्रणाली पर अगली बार कोई सकारात्मक निर्णय ले सकेगी ।
अभी बिहार के प्राय: प्रत्येक जिले में जाकर मुख्यमंत्री जी अपनी प्रगति यात्रा के सम्बन्ध में बातें करते हैं जनता की समस्याओ से रू वरू होते है और उसका निपटारा तुरत कराते हैं।
अगर प्रगति का कार्य इसी तरह चलता रहा तो इस वर्ष के विधान सभा चुनाव में 225 सीट नीतीश
कुमार के नेतृत्व में जीत कर एन डी ए
की सरकार बनने से कोई रोक नहीं सकता ।तब इतिहास के पन्नों में अंकित होगा एन डी ए के नीतीश कुमार सबसे जादा दिन तक मुख्यमंत्री
रहे ।

More Stories
काशी में शुक्लयजुर्वेद माध्यन्दिन शाखा के दुर्लभ ग्रंथ का लोकार्पण
डॉ मणि कुमार झा को असम और मणिपुर के राज्यपाल ने किया सम्मानित,, खुशी के पल को माता पिता ने किया महादेव भक्तों के साथ साझा
आधुनिक बिहार के निर्माता एवं बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री ”बिहार-केसरी ”डा 0 श्रीकृष्ण सिंह जी की पुण्य तिथि 31 जनवरी पर शब्द- सुमनों के भाव-माला से हम अपनी विनम्र श्रद्धा निवेदित करते हैं। (रवींद्र कुमार रतन )