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कथा में शरीर से बैठना बैठना नहीं बल्कि मन बुद्धि चित को कथा में लगाना बैठना होता है : स्वामी श्री राम प्रपन्नाचार्य जी।

गया से अमरेंद्र कुमार का रिपोर्ट

भागवत कथा ब्यास से श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि कथा में सिर्फ शरीर से उपस्थित होना सिर्फ फलदाई नहीं होता बल्कि कथा में मन बुद्धि चित से ध्यान लगाना ही पूर्ण बैठना होता है। कथा व्यास से श्रोताओं को संबोधित करते हुए बताया कि अहंकार वश कोई कार्य नहीं करना चाहिए जैसे अहंकार बश राजा दशरथ ने श्रवण कुमार को वाण मारे उसका फल उन्हें अपने पुत्र वियोग के रूप में मिला। हनुमान जी को अहंकार हुआ कि लक्ष्मण के लिए मेरे अलावे कोई संजीवनी लेकर नहीं आएगा। हनुमान जी को अपने बल की अभिमान हो गया था जिसके कारण उन्हें भरत जी के वाण से नीचे गिरना पड़ा।


भगवान के कृपा का अवलंबन लेकर ही मनुष्य महान बनता है। भागवत को मुंह से नहीं कान से पियो, वार वार पियो ये आपका कल्याण कर देगा। जिस सुकदेव जी को माया खींच नहीं सका उस सुकदेव जी जैसे निवृति पारायण संत को भागवत की श्लोक ने वेद व्यास के आश्रम में भागवत सीखने के लिए खींच लिया इतनी शक्ति है भागवत के अश्लोकों में। यही सुकदेव जी ने आगे चलकर भागवत कथा राजा परीक्षित को सुनाया जिससे उन्हें तक्षक काटने के बाद मुक्ति मिली।

पद , पैसा, प्रतिष्ठा और परिवार झगड़ा के ये चार मुख्य कारण है। स्वामी जी ने बताया कि मन अगर रोगी है तो तन कभी स्वस्थ नहीं रहेगा जैसे दुर्योधन का मन रोगी हो चुका था। दुर्योधन ने कुटिलता वश युधिष्ठिर को जुआ खेलने के लिए आमंत्रित किया जो वैदिक कर्म के विरुद्ध था, और जिसका परिणाम कुल विध्वंश के रूप में हुआ। इसलिए मानव को सदैव अधम कार्यों से बचना चाहिए। कथा के आयोजक एवं बिट्रीज बायो रेमेडीज के मैनेजिंग डायरेक्टर निखिल कुमार ने श्रद्धालुओं से प्रतिदिन की कथा में तन मन धन से शामिल होने का आह्वान किया। कथा व्यवस्था से जुड़े शिक्षक नीरज कुमार, सेशांक खिलौशकर, रणवीर सिंह,कुंवर सिंह रोहित सिंह लोगों ने भी कथा की सफलता पूर्वक संचालन पर खुशी व्यक्त किया और श्रद्धालुओं से कथा में शामिल होने का आग्रह किया।