फाइलेरिया विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अपंग करने वाली बीमारी का उन्मूलन जनभागीदारी से ही संभव है।
स्वास्थ्य विभाग के अलावे अन्य सभी विभागों के साथ जनसमुदाय का सहयोग अपेक्षित है।
एमडीए कार्यक्रम के लिए जिले में चल रहा है व्यापक प्रचार-प्रसार
देवघर से प्रेम रंजन झा का रिपोर्ट
देवघरः 10 से 25 फरवरी तक जिले भर में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान अंतर्गत एमडीए कार्यक्रम चलाया जाएगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने सभी तैयारिया पूरी कर ली है। गुरुवार को सिविल सर्जन डॉ0 रंजन सिन्हा ने सदर अस्पताल, देवघर के सभागार में प्रेस वार्ता कर फाइलेरिया उन्मूलन अभियान व उसकी तैयारी को लेकर विस्तृत जानकारी देते हुए सभी की सहभागिता की अपील की। उन्होंने कहा कि 10 फरवरी को चिन्हित 2721 बूथों पर एल्बेंडाजोल व डीईसी की दवा कुल 6652 दवा प्रशासक दलों द्वारा खिलाई जाएगी। इसके बाद दवा प्रशासक – सहिया, सेविका, स्वयं सेवी तथा अन्य कर्मीयों द्वारा 11 से 25 फरवरी 2024 तक घर-घर जाकर अपने सामने लोगों को दवा खिलाएंगे।

बताया कि फाइलेरिया के कारण होने वाले हाइड्रोसील की तो सर्जरी हो जाती है लेकिन हाथ, पैर, स्तन या शरीर के अन्य अंगों का सूजन पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है। फाइलेरिया के परजीवी मनुष्य के लसिका तंत्र में रहते हैं। लंबे समय तक बीमारी रहने पर हाथ, पैर, स्तन एवं अंडकोष में सूजन हो जाता है।

सामूहिक दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम के तहत साल में एक बार डीइसी और एलबेंडाजोल की गोली का सेवन करके इस बीमारी से बचा जा सकता है। दो साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती माताओं और गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को छोड़कर अन्य सभी को दवा का सेवन करना चाहिए।
सिविल सर्जन ने कहा कि फाइलेरिया एक गंभीर रोग है जो शरीर को अपंग और कुरूप बनाती है। दीर्घकालीन विकलांगता में यह बीमारी विश्व में दूसरे स्थान पर है। लिम्फैटिक फाइलेरिया को आम तौर पर हाथीपांव के नाम से जाना जाता है। फाइलेरिया के लक्षण उभरने में कम से कम 05 से 15 साल का समय लगता हैं, लक्षण उभरने के पूर्व इसकी पहचान मुश्किल है। इसकी जांच के लिए रात में रक्त के नमूने लिए जाते हैं। अगर कोई व्यक्ति लगातार पांच साल से सात साल तक सर्वजन दवा सेवन के तहत दी जाने वाली दवाओं का सेवन करता है, तो उसमें फाइलेरिया के परजीवियों का प्रजनन लगभग रुक जाता है। यदि व्यक्ति को डीईसी एवं एलबेंडाजोल की एक खुराक वर्ष में एक बार खिलायी जाये, तो 80 से 90 प्रतिशत तक इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है और फाइलेरिया की संभावना प्रायः कम हो जाती है। वर्ष 2027 तक भारत से फाइलेरिया को उन्मूलित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। झारखंड के देवघर सहित सभी जिले इससे प्रभावित है।

देवघर जिले के कुल 18.90 लाख जनसंख्या में से दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती माताओं और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को छोड़कर शेष 16,62792 जनसंख्या को इस वर्ष फाइलेरिया रोधी दवा खिलाकर आच्छादित किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। फाइलेरिया बूथः- दिनांक 10 फरवरी को बूथ पर दवा खिलाने हेतु जिला में कुल 2721 फाइलेरिया बूथ के रूप में सभी आंगनवाड़ी केंद्र, सहिया दीदी का घर, स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अलावे सामुदायिक भवन/वार्ड कार्यालय/विद्यालय आदि को आवश्यकता के अनुसार चिन्हित किया गया है। जिसमें प्रातः 09.00 बजे से अपराह्न 03.00 बजे तक दवाएं खिलाई जाएगी।

दवा प्रशासकः- आगे बताया गया कि 10 से 25 फरवरी 2024 तक चलने वाले एमडीए महाअभियान कार्यक्रम को लेकर दवा प्रशासक के तौर पर जिले में कुल 6652 सहिया दीदी, सेविका दीदी, सखी मण्डल एवं स्वयं सेवकों द्वारा दवा खिलाने हेतु प्रशिक्षण दिया गया है।
एमडीए कार्यक्रम हेतु सभी दवा प्रशासक दलों को एक फैमिली रजिस्टर उपलब्ध करायी गई है। जो कार्ययोजना के अनुसार दिनांक 11 फरवरी से 25 फरवरी तक प्रतिदिन अधिकतम 15 से 20 घरों में जाकर दवा खिलाएंगी। साथ ही फाइलेरिया मरीज की लाइन लिस्टिंग भी इसी रजिस्टर के माध्यम से की जाएगी एवं दवा सेवन उपरांत प्रतिकुल प्रभाव वाले व्यक्तियों को भी सूचीबद्ध कर उन्हें फाइलेरिया की पूर्ण खुराक खिलाकर भविष्य में होने वाले विकलांगता से बचाया जायेगा।

पर्यवेक्षकः – प्रत्येक 10 टीमों पर एक सुपरवाइजर अर्थात् कुल 665 दवा पर्यवेक्षक, 68 प्रखंड स्तरीय पर्यवेक्षक तथा 42 प्रखंड स्तरीय अनुश्रवण एवं 11 जिला स्तरीय अनुश्रवण पदाधिकारियों को लगाया गया है।
दवा की खुराक: – 2 से 5 वर्ष के बच्चों को डीईसी की 1 गोली और अल्बेंडाजोल की 1 गोली] 6 से 14 वर्ष के बच्चों को डीईसी की 2 गोली व अल्बेंडाजोल की 1 गोली तथा 15 वर्ष से ऊपर के लोगों को डीईसी की 3 गोली व अल्बेंडाजोल की 1 गोली दवा प्रशासकों द्वारा अपने सामने खिलाएंगी। साथ ही 1 से 2 वर्ष के बच्चों को कृमि मुक्ति हेतु आधी गोली अल्बेंडाजोल की पानी में घोलकर पिलाया जाएगा।
दवा का प्रतिकुल प्रभाव: – बताया गया कि जिनके शरीर में फाइलेरिया के संक्रमण मौजूद होगा उन्हें थोडा प्रतिकूल प्रभाव हो सकता है, घबराएं नही, दवा का हल्का प्रतिकुल प्रभाव 01 से 2 प्रतिशत को हो सकता है। ध्यान रहें कि खाली पेट दवा नहीं खानी है। दवा खाने से शरीर के अंदर मरते हुए कीड़ों की वजह से कभी-कभी किसी व्यक्ति को सिर दर्द, बुखार, उल्टी, बदन पर चकते एवं खुजली हो सकती है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। यह स्वतः ठीक हो जाएगा। फिर भी ज्यादा दिक्कत होने पर ऐसे लोगों को चिकित्सकों की निगरानी में रखा जाएगा। इसके लिए सभी प्रखंडों में दो-दो त्वरित चिकित्सा दल (आरआरटी) का गठन किया गया है और सभी पर्यवेक्षकों को आवश्यक जीवन रक्षक दवाएं भी उपलब्ध कराई जाएगी। ताकि मामूली प्रतिकूल प्रभाव से तत्काल निपटा जा सके। आकस्मिक स्थिति से निपटने हेतु जिले में कुल 21 आरआरटी दल के साथ जिला भीबीडी कार्यालय, देवघर तथा सभी सीएचसी में एक-एक कंट्रोल रूम (कुल – 10) बनाया गया है। जिसका मोबाइल संख्या भी जारी करने का निर्देश दिया गया है।

दैनिक संध्याकालीन समीक्षा बैठकः- प्रतिदिन शाम को संध्याकालीन समीक्षा बैठक गूगल मीट द्वारा करते हुए एमडीए कार्यक्रम के दैनिक प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा ताकि कोई भी क्षेत्र फाइलेरिया रोधी दवा खाने से वंचित ना रह जाए। इस हेतु कुल 112 अलग अलग क्षेत्रों में टोटो द्वारा माइकिंग भी कराई जाएगी। जिसके क्रम में आज शहरी क्षेत्रों में जागरूकता हेतु आठ प्रचार-प्रसार गाड़ी को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। शेष सभी सीएचसी में कल से चालू किया जाएगा।
डॉ गणेश कुमार ने बताया कि झारखंड में रहने वाले सभी चार करोड लोगों को एवं भारत के 50 करोड लोगों को इस (फाइलेरिया) बीमारी का होने का खतरा मंडरा रहा है। झारखंड में सबसे ज्यादा फाइलेरिया के रोगी देवघर जिला में चिन्हित हैं। वर्ष 2023 के अक्टूबर माह रात्रि रक्तपट्ट संग्रह कर माइक्रोफाइलेरिया प्रसरण दर की जांच करने पर यह चार प्रतिशत के लगभग पाया गया। ये माइक्रोफाइलेरिया धनात्मक रोगी में अभी तक कोई अंग प्रभावित नहीं हुआ है किंतु इनमें फाइलेरिया के परजीवी निष्क्रिय अवस्था में मौजूद हैं जो कुछ वर्षों में इन सभी लोगों में अचानक से फाइलेरिया के लक्षण आ जाएंगे। जिससे फिर छुटकारा मुश्किल होगा। यदि आज हम सभी इस दवा का सेवन नहीं करेंगे तो वह समय दूर नहीं होगा, जब हमारे घर के बच्चे एवं आने वाले पीढ़ी भी इस बीमारी की चपेटे में आने से बच पाएंगे। इसलिए आईए हम सब मिलकर यह संकल्प लेते हैं कि :
साल की बस एक खुराक फाइलेरिया रोधी दवा खाएंगे और देवघर को फाइलेरिया मुक्त जिला बनाएंगे।
खुशहाल होगा शहर और गांव, जब देवघर में मिटेगा जड़ से हाथीपांव।
मौके पर जिला भीबीडी सालाहकार डॉ गणेश कुमार यादव, डीपीएम नीरज भगत, डीपीसी प्रवीण कुमार सिंह, पीरामल स्वास्थ्य के डीपीओ संजय कुमार मंडल, पीसीआई के जिला समन्वयक श्रवण कुमार झा, एफएलए रवि सिन्हा, डीईओ कांग्रेस मंडल, सुमंत कुमार सिंह सहित अन्य मौजूद थे।

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