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_श्याम सुंदर शिक्षा सदन में गांधी जी की पुण्यतिथि मनाई गई_

देवघर से प्रेम रंजन झा का रिपोर्ट

देवघर।आज मंगलवार को स्थानीय श्याम सुंदर शिक्षा सदन में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि शहीद दिवस के रूप में सादगी पूर्वक सुश्री निर्मला ठाकुर की अध्यक्षता में मनाई गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शत्रुघ्न प्रसाद उपस्थित रहे विशिष्ट अतिथि के रूप में बम शंकर मिश्र उपस्थित थे । कार्यक्रम की शुरुआत महात्मा गांधी के सर्वधर्म प्रार्थना एवं उनके प्रिय भजन वैष्णव जन तेने कहिए से प्रारंभ हुई । प्रार्थना के उपरांत मौन एवं ध्यान का अभ्यास रखा गया इस कार्यक्रम में लगभग 45 बच्चों ने भाग लिया। यह सभी बच्चे पुण्यतिथि के अवसर पर विद्यालय के शिक्षक आचार्य विनोद के साथ सामूहिक रूप से उपवास पर शामिल हुए थे। कार्यक्रम में अपनी बात रखते हुए आचार्य विनोद ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा की उपवास एवं भोजन का त्याग दोनों दो अलग-अलग बातें हैं । उपवास से हमें योग की प्राप्ति होती है तथा हम भोग से उपरत होते हैं । उन्होंने आगे कहा गांधी जी अजातशत्रु थे। दक्षिण अफ्रीका में रहते हुए उन्होंने मीर आलम एवं कैलन बैक के दो घटनाओं का जिक्र करते हुए किस कदर उन्होंने मृत्यु पर विजय पाई थी इसका ऐतिहासिक जिक्र किया गया फिर सेवाग्राम आश्रम वर्धा का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया की खुले आसमान के नीचे जमीन पर एक चटाई डालकर वे सोया करते थे। उनका मानना था कि यह शरीर भगवान जब तक रखना चाहेगी रखेगा जब इसकी जरूरत नहीं रहेगी वह इस शरीर को किसी निमित से पूरा कर लेगा। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने बच्चों से आवाहन किया कि उन्हें गांधी जी की आत्मकथा सत्य के प्रयोग अवश्य पढ़ने चाहिए तथा गांधी जी के बताए हुए मूल्य को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए। उन्होंने सादगी , सत्य के प्रति दृढ़ भाव होना, खादी के वस्त्र के संदर्भ में स्वावलंबन को लेकर विदेशी वस्त्र से अपने को दूर रहने की नसीहत दी । इस अवसर पर कार्यक्रम के अंत में निर्मला दीदी के द्वारा बच्चों को आशीर्वाद दिया गया तथा सेवक की प्रार्थना एवं एकादश व्रत को जीवन में शामिल करने की बात कही । बच्चों के अंदर सात्विक , अहिंसक एवं सर्वधर्म समभाव विषय के प्रति उन्हें जागरूक किया गया तथा सादा जीवन उच्च विचार को अपनाने का बच्चों ने संकल्प किया और नाम धुन के साथ कार्यक्रम की समाप्ति हुई । इस अवसर पर विद्यालय के संगीत शिक्षक प्रशांत सर के द्वारा भाव संगीत प्रस्तुत किया गया।